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एनडीए के घटक दलों का टकराव क्या तीसरे मोर्चे को जन्म देगा ?

आजकल भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए में टकराव की स्थिति आ गई है। बहाना भावी प्रधानमंत्री का है लेकिन वास्तविकता इससे दूर नजर आती है। एनडीए के घटक दल इस ओर इशारा कर रहे हैं कि वह 2014 में होने वाले चुनावों के बाद एनडीए के साथ नहीं रहेंगे।

भाजपा गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में सामने लाती है तो उनके घटक दल किसी और का नाम उछालकर किए कराए पर पानी फेर देते हैं। बिहार के मुख्‍यमंत्री को तो नरेन्द्र मोदी फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। उधर बाल ठाकरे सुषमा स्वराज का नाम भावी प्रधानमंत्री के रूप में सुझा देते हैं। इसी तरह कोई अरुण जेटली तो कोई अनुराग ठाकुर का नाम भावी प्रधानमंत्री के रूप में लेकर इस मामले को चाट पकौड़ी बाजार का बना देते हैं। ऐसे बातें करने वाले लोगों की मंशा यही लगती है कि वह इस इंतजार में हैं कि कब यूपीए के घटक टूट कर तीसरा मोर्चों बनाएं और उन्हें उसमें शामिल होने का निमंत्रण दें। ताकि वह अपनी शर्तों के मुताबिक राजनीति के उस मुकाम तक पहुंच जाएं जिसके वह आजकल सपने ले रहे हैं।

यहां यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए नाम तय होने के बाद ही देश में नई केन्द्र सरकार बनाने के लिए कोई नया गठजोड़ तैयार हो पाएगा। यदि दो दीदियों ममता व जया और दोनों भाइयों मुलायम व नितिश में एका हो गया तो ही तीसरे मोर्चे की बात आगे बढ़ पाएगी। वरना मौजूदा दोनों गठबंधनों के सहयोगियों को पुराने दड़बों में घुसना पड़ेगा।

Tags :NDA,Gujarat, Narender Modi,Nitish Kumar,Sushma Swaraj

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