North India Times

कौन बनेगा राज्यपाल कौल सिह ठाकुर या विद्या स्टोक्स !

शिमला : हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह के हथिया लिए जाने के बाद प्रतिपक्ष की नेता विद्या स्टोक्स और कौल सिंह ठाकुर के पास एक ही रास्ता बचा है कि वह किसी राज्य का राज्यपाल बनकर अपने राजनैतिक भविष्य को बचा लें। ऐसा करने से उन्हें कम से कम भारत के संविधान को जानने का अवसर तो मिल सकेगा। यह बात भी तय है कि पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह के हाथों उन्हें राजनैतिक पटकनी इसी वजह से लगी है कि वह संवैधानिक मसलों पर प्रदेश की मौजूदा सरकार को घेरने में विफल रहे हैं।

आज यह बात तय नहीं है कि श्रीमती स्टोक्स और ठाकुर कौल सिंह अपना विधानसभा चुनाव भी जीत पाएंगे या नहीं। अभी यह बात भी नहीं कही जा सकती है कि कांग्रेस पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में सत्तारूढ़ हो पाएगी या नहीं। पर यह बात तो तय हो चुकी है कि यदि कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ हो जाती है तो प्रदेश का मुख्‍यमंत्री कम से कम श्रीमती स्टोक्स और कौल सिंह ठाकुर नहीं बन पाएंगे। इसके लिए अब जंग पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह और आनंद शर्मा के बीच ही हो सकती है, जो भारत के संविधान की अच्छी जानकारी रखते हैं। अब कौन मुख्‍यमंत्री बन पाएगा यह बात पूरी तरह से पार्टी आलाकमान पर निर्भर करती है।
यदि विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस पार्टी फिर से विपक्ष में चली जाती है तो प्रतिपक्ष के नेता वीरभद्र सिंह ही बनेंगे। ऐसे में दोनों के लिए राजनैतिक टकराव उनके राजनैतिक भविष्य के लिए अच्छा नजर नहीं आ रहा है। इस उथल पुथल में दोनों में से जो भी विधानसभा चुनाव में पराजित हो गया तो कांग्रेस की राजनीति में उसके लिए द्वार सदा के लिए बंद हों जाएंगे। यह समय उपरोक्त दोनों नेताओं के लिए चिंतन और विवेक से काम लेने का है। देखना यह है कि दोनों आने वाले समय में मौजूदा राजनीति को देखते हुए किस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं।

ऐसे में जो भी आलाकमान द्वारा राज्यपाल बनने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेगा वह लाभ की स्थिति में रहेगा। वरना आने वाले तीन चार महीने उपरोक्त दोनों नेताओं के लिए काफी चुनौती भरे रहेंगे। क्योंकि उन्हें जहां कांग्रेस से मजबूत चल रही भाजपा के तीखे आक्रमणों का सामना करना पड़ेगा वहीं अपने कांग्रेस के मित्रों के भीतराघात का भी सामना करना पड़ेगा। ऐसे में उन्हें बड़े राजनैतिक नुक्सान का सामना भी करना पड़ सकता है। यह बात भी अब राजनैतिक गलियारों में चल पड़ी है कि श्रीमती स्टोक्स और कौल सिंह अब वीरभद्र के मजबूत होने के बाद मुख्‍यमंत्री की कुर्सी से बहुत दूर हो गए हैं।

कहते हैं कि यदि इनमें से कोई भी राज्यपाल बनने को तैयार हो जाता है तो उसे यह पद आसानी से मिल सकता है। ऐसा करके उन्हें इस बात का आभास भी हो जाएगा कि भारत का संविधान क्या है और उससे देश का संचालन कैसे होता है। साथ ही उन्हें यह जानने का मौका भी मिल सकेगा कि राजनैतिक जीवन में संवैधानिक त्रुटियां करने के बाद ही वह प्रदेश के मुख्‍यमंत्री नहीं बन पाए थे। जबकि आलाकमान ने उन्हें मुख्‍यमंत्री बनने का सुअवसर भी दिया था।

Tags: Kaul Singh Thakur, Vidya Stokes, Virbhadra Singh, Himachal, Congress

संजय हिंदवान हिमाचल प्रदेश के गिने-चुने निर्भीक और कर्मठ वरिस्ठ पत्रकारों मे से एक हैं | उनकी कई याचिकाओं पर हाई कोर्ट मे कई मत्वपूर्ण फ़ैसले दिए हैं| वह साप्ताहिक समाचार पत्र ग्रास के संपादक- प्रकाशक हैं| उनका पता है: hindwansanjay@gmail.com

Leave A Reply

Your email address will not be published.