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क्या तीसरा मोर्चा बनाने के लिए मुलायम कांग्रेस से समर्थन वापिस लेंगे ?

नई दिल्ली: : समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह कभी भी कांग्रेस का साथ छोड़ सकते हैं। ऐसे संकेत वह 2014 में तीसरा मोर्चा की सरकार के बनने की बात कहकर पहले ही दे चुके हैं। कांग्रेस से समर्थन वापसी का फैसला लेने में उनकी निगाहें बसपा की मायावती की चाल पर टिकी हैं।

सपा के केन्द्र से समर्थन वापस लेने के पीछे सबसे बड़ा तर्क यह दिया जा रहा है कि मायावती और मुलायम सिंह दोनों इस समय डा. मनमोहन की सरकार को अपना समर्थन दिए हुए हैं। यह बात भी तय है कि दोनों अधिक दिनों तक यूपीए के साथ नहीं रह पाएंगे। कांग्रेस या तो मायावती के साथ उत्तर प्रदेश में अगला लोकसभा चुनाव लड़ेगी या मुलायम सिंह के साथ। जब यह बात तय करने का वक्त आएगा तो कांग्रेस सरकार अल्पमत में आकर गिर जाएगी। ममता बनर्जी के समर्थन वापस लेने के बाद कांग्रेस इस उल्झन में फंस गई है कि वह इधर जाए या उधर जाए।

केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए मुलायम सिंह ने तीसरे मोर्चे की तान छेड़ दी है। इशारा साफ है कि कांग्रेस इस बात को तय करे कि उसे मुलायम के साथ चलना है या मायावती के साथ। फिलहाल कांग्रेस इस मसले पर चुप्पी साधे हुए है। इसके लिए मात्र ढेड़ वर्ष का ही समय बचा है। तीसरा मोर्चा बनाने के लिए यह समय बहुत कम है। अनुमान यह लगाया जा रहा है कि ममता के समर्थन वापस लेने के मामले के ठंडा पड़ने के कुछ समय बाद ही मुलायम सिंह कांग्रेस से समर्थन वापस लेकर मध्यावधि चुनावों की ताल ठोक सकते हैं। इसका अभ्यास उन्होंने अभी से शुरू कर दिया है।

अब देखना यह है कि मुलायम को अगला प्रधानमंत्री बनने के मनसूबों के लिए अपना फैसला एक दो माह में ही लेना है। गुजरात चुनावों के बाद यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि 2014 के चुनावों में एनडीए और यूपीए कैसी रहती हैं। इसके बाद तीसरे मोर्चे की संभावनाएं और प्रबल हो जाएंगी। ऐसे में मुलायम को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार करने वाले दल किस प्रकार की प्रतिक्रयाएं देते हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि देश में हालात ऐसे बन रहे हैं कि कभी भी केन्द्र में चुनावों की नौबत आ सकती है।

Tags: Mulayam Singh Yadav, congress, third front

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