North India Times

- Advertisement -

क्या हिमाचल की अगली सरकार गठबंधन की सरकार होगी ?

शिमला : पिछले दशक से पहले की स्थिति हिमाचल में फिर से निर्मित होती हुई प्रतीत हो रही है। इसीलिए हिमाचल प्रदेश में गठबंधन सरकार बनने की संभावनाओं की अटकलबाजी भी तेज हो रही है। जब जब हिमाचल में कांग्रेस और भाजपा में विघटन हुआ है तब तब प्रदेश में गठबंधन सरकार सत्ता में आई है। इस बार सत्तारूढ़ भाजपा विभाजित होने के बाद चुनाव मैदान में उतर रही है। इससे पहले कांग्रेस में विभाजन होने के बाद प्रदेश में गठबंधन सरकार सत्तारूढ़ हुई थी।
हिमाचल में पूर्व मुख्‍यमंत्री शांता कुमार ने गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया था लेकिन यह सरकार ढ़ाई वर्ष में ही दम तोड़ गई थी। इसके बाद पंडित सुखराम के साथ मिलकर मुख्‍यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने गठबंधन सरकार पूरे पांच वर्ष तक चलाई। कांग्रेस की सरकार के पूर्ण बहुमत में आने के बाद पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह ने चार वर्ष तक सरकार चलाई। समय से पूर्व विधानसभा भंग हो जाने के बाद मौजूदा धूमल सरकार अपना साढ़े चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकी है। लेकिन उनकी पार्टी के कुछ लोगों ने नाराज होकर हिमाचल लोकहित पार्टी का गठन कर लिया है। अब लोकहित पार्टी ने सीपीआई और सीपीएम को साथ मिलाकर लोकहित मोर्चा का गठन कर लिया है।
कांग्रेस और भाजपा की अंदरूनी लड़ाई को देखकर कहा जा सकता है कि दोनों पार्टियों को अपने अंदर मौजूद नेताओं से ही ज्यादा खतरा बना हुआ है। ऐसे में दोनों के बहुमत में आने के दावे खोखले महसूस हो रहे हैं। ऐसे में जहां तीसरे मोर्चा ने दमदार प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार दिए वहां उनकी जीत से इनकार नहीं किया जा सकेगा। कांग्रेस और भाजपा को सरकार बनाने के लिए कुल 68 सीटों में से कम से कम 34 सीटें जीतनी जरूरी हैं। जबकि तीसरे मोर्चे के लिए पांच छह सीटें जीतकर बनने वाली सरकर के बीच खड़ा हो जाने का लक्ष्य है। जो दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के लक्ष्य के सामने बहुत कम है।

यह बात सभी मानने को तैयार हैं कि हिलोमा को प्रदेश में पूर्णबहुमत नहीं मिल पाएगा। लेकिन बहुत से लोग इस बात से इत्तफका रखते हैं कि पांच छह सीटें हिलोमा भी जीत सकती है। शिमला, सोलन, सिरमौर, कांगड़ा और कुल्लू में कम से कम एक से दो सीटों पर हिलोमा कांग्रेस और भाजपा को हराने की क्षमता रखती है। इसके अतिरिक्त शेष सात जिलों की करीब 30 सीटों पर हिलोमा प्रत्याशियों ने यदि एक दो सीटें झटक ली तो हिमाचल में गठबंधन सरकार बनने की नौबत आ सकती है।
ऐसे में हिलोमा को कमजोर मान लेना भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनाव परिणाम आने के बाद भारी पड़ सकता है। हिमाचल में अभी तक यही कहा जा रहा था कि यहां तीसरे विकल्प की संभावना बहुत कम है। लेकिन हिमाचल एक बार फिर वही इतिहास दोहराने के कगार पर खड़ा हो गया है। अब तो यह भी नहीं कहा जा सकता कि हिमाचल में गठबंधन सरकार सफलतापूर्वक नहीं चल सकती है। इस बार तो गठबंधन सरकार बनने के हालात इसलिए भी प्रबल नजर आ रहे हैं क्योंकि कांग्रेस और भाजपा में इतना बड़ा टकराव इससे पहले कभी नहीं देखा गया है। इस बात की संभावना ने भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि कई सीटों पर कांग्रेस के लोग भाजपा को और भाजपा के लोग कांग्रेस को वोट डालेंगे। ऐसे में यदि तीसरा प्रत्याशी दोनों के नाराज वोटों को अपनी ओर खींचने में कामयाब हो गया तो भाजपा और कांग्रेस की मुश्किलें और भी अधिक बढ़ सकती हैं। यदि तीसरा मोर्चा 10 से 12 सीटें जीत गया तो वह कांग्रेस और भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने तक भी पहुंच सकता है।

 

संजय हिंदवान हिमाचल प्रदेश के गिने-चुने निर्भीक और कर्मठ वरिस्ठ पत्रकारों मे से एक हैं | उनकी कई याचिकाओं पर हाई कोर्ट मे कई मत्वपूर्ण फ़ैसले दिए हैं| वह साप्ताहिक समाचार पत्र ग्रास के संपादक- प्रकाशक हैं| उनका पता है: hindwansanjay@gmail.com

Tags: Himachal Pradesh, BJP, Congress, Virbhadra Singh, Prem Kumar Dhumal,Shanta Kumar, Maheshwar Singh , Shimla, Solan,Kullu

Leave A Reply

Your email address will not be published.