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सरदार पटेल के जन्मदिन पर मोदी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर क्या कहा !

 सरदार साहेब की प्रेरणा से ही हम संपूर्ण भारत के emotional, economic और constitutional integration पर बल देने की परम्‍परा को आगे बढ़ा रहे हैं

साथियों, जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख में नई व्‍यवस्‍थाएं जमीन पर लकीर खींचने के लिए नहीं हैं, ये मैं बहुत जिम्‍मेदारी के साथ कह रहा हूं। ये हमारा निर्णय जमीन पर लकीरें खींचने के लिए नहीं है बल्कि विश्‍वास की एक मजबूत कड़ी बनाने के लिए किया गया सार्थक प्रारंभ है। 

लोह पुरुष सरदार पटेल के जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैं मैं जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए यह फैसला बेहद जरूरी था।

साथियों, अगस्‍त के महीने में राष्‍ट्र के नाम संबोधन में मैंने जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों से एक और वादा किया था। मैंने कहा था कि राज्‍य के कर्मचारियों को, जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस को दूसरे केंद्रशासित प्रदेशों के कर्मचारियों के बराबर, union territories के employees के बराबर सुविधाएं मिलेंगी। मुझे खुशी है कि आज से जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के सभी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग द्वारा स्‍वीकृत भत्‍तों का भी लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

साथियों, जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख में नई व्‍यवस्‍थाएं जमीन पर लकीर खींचने के लिए नहीं हैं, ये मैं बहुत जिम्‍मेदारी के साथ कह रहा हूं। ये हमारा निर्णय जमीन पर लकीरें खींचने के लिए नहीं है बल्कि विश्‍वास की एक मजबूत कड़ी बनाने के लिए किया गया सार्थक प्रारंभ है।  यही विश्‍वास है, जिसकी कामना सरदार वल्‍लभ भाई पटेल ने भी जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के लिए की थी, सपना देखा था। और मैं फिर दोहराऊंगा- देश की एकता, देश की एकता पर होने वाले हर हमले को हम परास्‍त करेंगे, मुंह तोड़ जवाब देंगे। देश की एकता को तोड़ने के किसी भी प्रयास को- लोकतांत्रिक ताकत इतनी बड़ी होती है, जनभावना इतनी मजबूत होती है कि वे कभी भी टिक नहीं पाएगी।

साथियों, सरदार साहेब की प्रेरणा से ही हम संपूर्ण भारत के emotional, economic और constitutional integration पर बल देने की परम्‍परा को आगे बढ़ा रहे हैं। ये वो प्रयास है जिसके बगैर 21वीं सदी के विश्‍व में भारत की मजबूती की कल्‍पना हम नहीं कर सकते।

भाइयों और बहनों, याद करिए एक समय था जब नॉर्थ-ईस्‍ट और शेष भारत के बीच की अविश्‍वास की खाई इतनी गहरी होती जा रही थी। वहां की physical connectivity और emotional connectivity, दोनों को लेकर गंभीर सवाल बार-बार खड़े होते थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। आज नॉर्थ-ईस्‍ट का अलगाव- लगाव में बदल रहा है। दशकों पुरानी समस्‍याएं अब समाधान की तरफ बढ़ रही हैं। हिंसा और blocked के एक लंबे दौर से पूरे नॉर्थ-ईस्‍ट को मुक्ति मिल रही है और ये भी डंडे के जोर पर नहीं, उनके साथ भावनात्‍मक नाता जोड़कर। देश में integration के अन्‍य प्रयास भी- ये हमारी अविरत प्रक्रिया है, निरंतर जिम्‍मेदारी है और सभी देशवासियों की जिम्‍मेदारी है।

और इसलिए भाइयों-बहनों, लगातार हमारी कोशिश है और आप देख रहे हैं आधार की चर्चा है, आगे आधार है क्‍या। आधार यानी One nation one identity हो। जीएसटी यानी One nation one tax हो। E-NAM यानी One nation one agriculture market हो। बिजली और गैस के लिए One nation one grid हो, One nation one mobility card हो, One nation one optical fiber network हो, या फिर One nation one ration card हो। ये सभी एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत के vision को मजबूत करने का ही काम कर रहे हैं।

भाइयों और बहनों, सरदार साहब कहते थे- भारत में स्‍थायित्‍व के लिए बहुत आवश्‍यक है Unity of Purpose, Unity of Aims और Unity of Endeavour. हमारे उद्देश्‍यों में समानता हो, हमारे लक्ष्‍यों में समानता हो और हमारे प्रयासों में समानता हो।

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