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भाजपा, जजपा व कांग्रेस दलबदलुओं की दलदल : योगेन्द्र यादव

निराश क़रीब एक सौ नेताओं ने पार्टी बदल ली हैं. और इनमें से आधे चुनाव मैदान में उतर गए हैं

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने बयान जारी कर कहा कि भाजपा ने 15, जजपा ने 14 व कांग्रेस ने भी 2 ऐसे लोगों को अपना प्रत्याशी बनाया है जो कल तक उनकी धुर विरोधी पार्टी कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी के नेता थे। तब किस मुंह से ये दल विपक्षी पार्टी के खिलाफ बोलने का हक रखते हैं ।

योगेन्द्र यादव ने कहा जिस तरह राजनीतिक पार्टियों में दलबदल हो रहा है उससे स्पष्ट है कि सत्ताधारी या विपक्षी दल का एकमात्र उद्देश्य सिर्फ़ सत्ता हथियाना है और इसमें नौतिकता की कोई जगह नहीं रह गयी है.

टिकट पाने के लिए दल बदल रहे नेताओं की कड़ी आलोचना करते हुए यादव ने कहा कि जिस तरह टिकट पाने की लालसा और टिकट कटने की हताशा में नेता एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जा रहे हैं उसने कहावती तौर पर सिद्ध कर दिया है कि राजनीति में बरसाती मेंढक आ गए हैं और राज्य की राजनीतिक भूमि को दलदल बना दिया है।

ग़ौरतलब है कि चुनाव घोषणा से अब तक हरियाणा में एक पार्टी में टिकट कटने से नाराज़ और निराश क़रीब एक सौ नेताओं ने पार्टी बदल ली हैं. और इनमें से आधे चुनाव मैदान में उतर गए हैं.

यादव ने कहा कि हालाँकि ऐसी ही दलबदल की प्रवृति के कारण ही हरियाणा की राजनीति आया राम गया राम के नाम से बदनाम रही है, लेकिन मौजूदा हालात तो सत्ता-लोलुप्ता का  ऐसा दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं जिससे सत्ता पाने के लिए धुर-विरोधियों से भी समझौते हो रहे हैं.

यादव ने सत्तारूढ़ भाजपा के चरित्र पर हैरानी जताते हुए कहा कि विपक्षी दलों से पार्टी बदल कर चुनावी दौर में भाजपा में शामिल हुए कुल 15 नेताओं को भाजपा का टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया है. आश्चर्य है कि भाजपा कल तक जिन लोगों पर  देश विरोधी होने जैसे गम्भीर आरोप लगाती रही है अब सत्ता हथियाने के लिए उन्हें टिकट थमा रही है.  भाजपा का टिकट पाने वालों में तीन तो कांग्रेस से दल बदलकर आए हैं. इसके अलावा जजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए लोगों को टिकट देकर जनता के विश्वास पर आघात किया है. इस तरह की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है.

स्वराज इंडिया के हरियाणा  राज्य अध्यक्ष राजीव गोदारा ने कहा कि स्वराज इंडिया ने मूल्यों पर आधारित राजनीति करने के अपने संकल्प पर दृढ़ रहते हुए ऐसे व्यक्तियों को पार्टी का उम्मीदवार बनाया जिन्होंने समाज में रहते हुए अपनी पहचान बनायी और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी का परिचय दिया. उन्होंने कहा कि स्वराज इंडिया ने दल बदलकर आने वालों को कोई जगह नहीं दी क्योंकि स्वराज इंडिया मौक़ापरस्त राजनीति नहीं बल्कि राजनीति के एक नए स्वरूप की शुरुआत करने आया है.

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