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कृषि के लिए 30 हजार करोड़ रुपए पैकेज की घोषणा करना केवल छलावा : चौटाला

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इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने एक बयान में कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज में से कृषि के लिए 30 हजार करोड़ रुपए पैकेज की घोषणा करना केवल छलावे के सिवाय और कुछ भी नहीं है।

“सरकार दावा कर रही है कि इस पैकेज से किसान की आमदनी दुगुनी हो जाएगी और प्रधानमंत्री  कह रहे हैं कि हवाई चप्पल पहनने वाले अब हवाई जहाज में सफर करने लगेंगे, ये दोनों ही बातें दिन में सपने देखने जैसी लग रही हैं ।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी और करनी में अंतर है और सरकार की कुनीतियों के कारण ही कृषि घाटे का सौदा बनती जा रही है। वर्ष 1950 में कृषि का जीडीपी में 50 प्रतिशत हिस्सा था जो अब घटकर केवलमात्र 16 प्रतिशत रह गया  है। सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना द्वारा प्रति वर्ष छह हजार रुपए प्रति किसान आर्थिक सहायता देकर किसान की आमदनी दुगुनी करने का भाजपा का सपना पूरा होगा। परंतु भाजपा ने धान की खरीद में किसानों को जमकर लूटा और सरसों की कुल आमद में से 30 प्रतिशत खरीद की गई और बाकी की फसल व्यापारियों के रहमोकरम पर छोड़ दी गई।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने गेहूं का प्रति क्विंटल 1925 रुपए निश्चित किया था जबकि किसानों को वास्तव में 1911 रुपए प्रति क्विंटल की किसानों को अदायगी की जा रही है। सरकार ने वायदा किया था कि वह 125 रुपए प्रति क्विंटल किसानों को गेहूं की खरीद में बोनस दिलवाएगी परंतु खरीद करते समय सरकार अपना वायदा भूल गई है और नमी आदि का बहाना बनाकर किसानों को अपनी गेहूं बेचने के लिए मंडियों के बार-बार चक्कर काटने पड़े।

इनेलो नेता ने कहा कि सरकार किसानों की आमदनी दुगुनी कैसे करेगी जबकि फसलों पर ओलावृष्टि के नुकसान का किसानों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं दिया गया है, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अभी तक भी किसानों को मुआवजे की भरपाई नहीं की गई और निजी कंपनियों को 76 करोड़ रुपए प्रीमियम के तौर पर किसानों के खातों में से काटकर देने का काम किया। किसानों की जमीन पर बैंकों का कर्ज है, इसके लिए इस पैकेज में सरकार ने कोई ऐसी घोषणा नहीं की जिससे किसानों को कर्ज से राहत मिल सके। परंतु उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपए का कर्ज माफ करके सरकार ने किसान के साथ सौतेला व्यवहार किया है।

इनेलो नेता ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में केवल छह करोड़ किसानों को ही इस योजना का लाभ दिया है और सरकार के अनुसार देश में कुल 14 करोड़ किसान हैं। बड़ी हैरानी की बात है कि लगभग 63 प्रतिशत आबादी कृषि पर आधारित है या कृषि का धंधा करती है इसलिए जो भी व्यक्ति कृषि में संलिप्त हैए वह स्वयं खेती करता है या मजदूर है, वह सभी किसान की श्रेणी में आते हैं। मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि किसान अगर पैसे की चिंता करेगा तो मूल उद्देश्य से दूर हो जाएगा और धान की जगह मक्का बोने के लिए जबर्दस्ती बाध्य करती है। सरकार ने दूसरी फसलों के लिए न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है और न ही उनकी खरीद के बारे में किसानों को जानकारी दी है।

इनेलो नेता ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने लोकसभा में घोषणा की थी कि गेहूं पैदा करने पर प्रति क्विंटल 925 रुपए लागत आती है और तमाम खर्चे जोडकऱ भाव में 108.6 प्रतिशत की बढ़ौतरी करके 1925 रुपए गेहूं का भाव निश्चित किया है। बड़ी हैरानी की बात है कि डीएपी खाद, यूरिया खाद, कीटनाशक दवाएं, डीजल की बढ़ती दरें कृषि यंत्रों के आसमान छूते भावों को देखकर किसान की प्रति क्विंटल लागत प्रधानमंत्री जी के अंदाजे से लगभग तीन गुणा ज्यादा बन जाती है।

इनेलो नेता ने कहा कि आर्थिक विकास संगठन के सर्वे के अनुसार 2000 से लेकर 2017 तक फसलों का भाव सही न मिलने के कारण किसानों ने 45 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाया है और सरकार ने किसानों की कोई मदद नहीं की है। इसलिए सरकार ने अगर किसान की आमदनी दुगुनी करनी है तो उसको कृषि अर्थशास्त्री स्वामीनाथन रिपोर्ट की शर्तों के अनुसार सभी फसलों का भाव निश्चित करना होगा और यह ही स्वामीनाथन जी की आत्मा को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत छह हजार रुपए प्रति किसान अदायगी करके किसानों की आमदनी दुगुनी नहीं की जा सकती। मेरी फसल मेरा ब्योरा व मेरा पानी मेरी विरासत पोर्टल आदि नामों की घोषणा करने से किसानों की आमदनी दुगनी नहीं हो सकती। सरकार को पहले अपनी नीयत और नीतियों में बदलाव करके फसलों के उत्पादन लागत में पचास फीसदी अतिरिक्त लाभ जोडक़र न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करके फसलों का एक-एक दाना खऱीद करे तब कहीं जाकर किसानों को राहत की सांस मिलेगी वरना भाजपा सरकार के दावे केवलमात्र ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ के सिवाय और कुछ भी नहीं है।

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