गुजरात -हिमाचल में कांग्रेस की नही भाजपा की प्रतिष्ठा दाँव पर

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इस वर्ष 24 नवंबर को यह बात देश के सामने आ जाएगी कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जीरो होंगे या हीरो। भाजपा का आने वाला भविष्य भी गुजरात विधानसभा के बाद तय हो जाएगा। इन चुनावों में कांग्रेस की नहीं भाजपा की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है। गुजरात और हिमाचल में भाजपा की सरकारें हैं। यदि यहां फिर से भाजपा की सरकारें अपने वर्चस्व को प्राप्त कर लेती हैं तो कांग्रेस यही कहेगी कि यह राज्य तो पहले से ही भाजपा शासित राज्य रहे हैं।

यदि सरकार हिमाचल में चली जाती है तो केन्द्रीय राजनीति में भाजपा को मामुली सा झटका लगेगा। लेकिन यदि गुजरात में मोदी सरकार चली जाती है तो यह कहा जाएगा कि भाजपा केन्द्र में सरकार बनाने के ख्वाब ही देखती रह गई और उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। हलांकि कांग्रेस गुजरात में मजबूत स्थिति में नहीं है। लेकिन मोदी के एक दशक लंबे शासनकाल से वहां की जनता उक्ता गई और उन्होंने वहां कांग्रेस सरकार को सत्ता में आने का मौका दे दिया तो यह बज्रपात केवल गुजरात में ही नहीं होगा पूरे भारत में भाजपा केवल सफाई देने के अतिरिक्त और किसी काबिल नहीं रह जाएगी। क्योंकि उसका सबसे बड़ा दुर्ग गुजरात ही है, जहां से भाजपा केन्द्र में सरकार बनाने का दम भरती आ रही है।

अब कुछ ही दिनों में वहां आम विधानसभा चुनाव होने हैं। मोदी को इतना खतरा कांग्रेस से नहीं है जितना खतरा अपनों और अपने सहयोगियों से है। क्योंकि उनके कुछ विरोधियों का मकसद यह भी है कि गुजरात में ही मोदी को चित कर दिया जाए ताकि वह प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहंुचने से पहले ही इस बात को स्वीकार कर लें कि अब उनकी राजनीति पर 2014 तक विराम लगा दिया गया है। मोदी के समर्थक हिमाचल व गुजरात में मिशन रिपीट चला रहे हैं और उनके विरोधी इसे मिशन डिफीट में बदलना चाह रहे हैं।

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