चुनावों की आह्ट से गरमाया राजनीतिक माहौल !

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शिमला : चुनाव आयोग ने हिमाचल में आम चुनावों की अधिसूचना निर्धारित समय पर ही जारी करने की घोषणा कर दी है। अब हिमाचल में चुनाव सरकार के कार्यकाल समाप्त होने से कुछ दिन पूर्व ही होंगे। प्राप्त सूचना के अनुसार चुनाव दिसंबर माह के शुरू में ही एक साथ होंगे। इसी के साथ साथ प्रदेश का राजनैतिक माहौल तपने लगा है।
लगता है त्यौहारों के बीच में आ जाने के कारण चुनावों को आगे ले जाना चुनाव आयोग की मजबूरी बन गई। इससे जहां कांग्रेस को प्रदेश में सरकार बनाने के सब्जबाग लोगों को दिखाने का और अवसर मिल गया है। वहीं भाजपा फिर से सत्ता में आने की बात आम लोगों की बीच और जोर देकर कर सकेगी। उधर तीसरे विकल्प के रूप में आई हिलोमा सत्ता का संतुलन अपने हाथ में आने की बात लोगों को अच्‍छी तरह से समझा सकेगी।
भाजपा में जहां आपसी फूट कांग्रेस के मुकाबले कम है वहीं भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार की कसरत भी काफी तेज कर दी है। भाजपा में नेतृत्व के प्रश्न पर कोई बड़ा विवाद नहीं रह गया है। हिलोपा के भाजपा से बाहर निकलने के कारण पूर्व मुख्‍यमंत्री शांता कुमार की ताकत पार्टी में पहले से कम हुई है। लेकिन उन्होंने भी मुख्‍यमंत्री प्रेम कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए पार्टी को सत्ता में पुनः स्थापित करने की बात करनी शुरू कर दी है।

उधर कांग्रेस में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह को हटाने का गुबार अभी भी पार्टी में सुलग रहा है। नए अध्यक्ष वीरभद्र सिंह के पार्टी की कमान संभालने के बाद जहां संगठन में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, वहीं वीरभद्र समर्थकों को संगठन में डालने से स्थिति और अधिक चिंताजनक बन रही है। कुल मिलाकर अभी तक इतना तो कहा ही जा सकता है कि भाजपा प्रदेश में कांग्रेस से मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। कांग्रेस को अपनी स्थिति को संभालने के लिए थोड़ा वक्त और मिल गया है।

उधर तीसरे विकल्प का भविष्य भी कांग्रेस और भाजपा की स्थिति पर निर्भर हो गया है। यदि कांग्रेस कुछ मजबूत होती है तो ही तीसरे विकल्प का अस्तित्व बचा रह सकता है। वरना चार पांच सीटें जीतने के बाद भी हिलोमा को कोई लाभ नहीं होने वाला है। यदि कांग्रेस में अंतर कलह बढ़ती चली गई और वह कुल 10-15 सीटों में सिमट गई तो हिलोपा को मिलने वाली सीटें भी किसी काम नहीं आ सकेंगी। हिलोपा के बारे में सभी जानते हैं कि वह पूर्ण बहुमत तक पहुंचने वाली पार्टी अभी तक नहीं दिख रही है। यह बात हिलोपा के नेता भी मानते हैं कि वह आगामी राजनीति में सत्ता का संतुलन अपने हाथ में लेने का प्रयास करने में जुटे हुए हैं।

प्रदेश के हर चुनाव क्षेत्र में लोग इस बात के आंकलन में जुटे हुए हैं कि कौन सा प्रत्याशी इस बार चुनाव में बाजी मार ले जाएगी। इस बार आजाद प्रत्याशियों की ओर भी लोगों की निगाहें पिछले चुनावों के मुकाबले अधिक लगी हुई हैं। देश भी में पिछले दिनों भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए बड़े आंदोलन में भी यह बात स्थापित हुई है कि आगामी चुनावों में लोग कांग्रेस और भाजपा दोनों के प्रत्याशियों से अधिक आजाद प्रत्याशी पर भी अपनी निगाहें टिका सकते हैं।

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलनों में एक बात पर सभी ने जोर दिया है कि जहां कांग्रेस भ्रष्टाचार के प्रति संजीदा नहीं है वहीं भाजपा भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक नहीं है। इसलिए दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों को लोग आने वाले चुनावों में करारा सबक सिखाएं। हिमाचल में भी इस बात का थोड़ा बहुत असर हुआ है। इसका लाभ आगामी विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा। यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि हिमाचल में इस बार होने वाले चुनाव के परिणामों में आजाद प्रत्याशी पहले के मुकाबले अधिक संख्‍या में भी जीत सकते हैं। यदि लोगों का रुझान अच्छे प्रत्याशियों को जिताने की तरफ अधिक चला गया तो यहां परिणाम कुछ अलग रह सकते हैं।

Tags: Himachal Pradesh, Congress, BJP, third front,Virbhadra Singh , Kaul Singh, Prem Kumar Dhumal

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