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बल-छल से सत्ता में आए सिरसा ने संगत से भी किया छल : जीके

नगर कीर्तन मामलें में संगतों के दोषी दिल्ली कमेटी प्रबंधक पश्चाताप स्वरूप अपने पद छोड़े, जागो पार्टी की माँग

पाकिस्तान सरकार की मंजूरी न होने के बावजूद गुरुद्वारों की स्टेजों का इस्तेमाल ग्रंथी सिंहों से झूठ बुलवाने के लिए किया गया। साथ ही संगतों को गुरु नानक  देव जी के जन्म स्थान ननकाना साहिब तक नगर कीर्तन के रूप में ले जाने के लिए 278 पासपोर्ट जमा किए गए।

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 दिल्ली से ननकाना साहिब जाने वाले नगर कीर्तन को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा हस्तक्षेप करने के मामले में जागो पार्टी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके की प्रतिक्रिया भी आई है। जीके ने कहा कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने नगर कीर्तन के नाम पर कौम की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।
पाकिस्तान सरकार की मंजूरी न होने के बावजूद गुरुद्वारों की स्टेजों का इस्तेमाल ग्रंथी सिंहों से झूठ बुलवाने के लिए किया गया। साथ ही संगतों को गुरु नानक  देव जी के जन्म स्थान ननकाना साहिब तक नगर कीर्तन के रूप में ले जाने के लिए 278 पासपोर्ट जमा किए गए।
इन 278 श्रद्धालुओं को जहाँ दिल्ली कमेटी की तरफ से तो वीजा नहीं दिलवाया गया, वहीं परमजीत सिंह सरना के द्वारा 28 अक्टूबर को प्रस्तावित नगर कीर्तन में जाने के लिए पासपोर्ट जमा करवाने का मौका भी उक्त श्रद्धालुओं ने कमेटी की हठधर्मिता के कारण गवा लिया है।
दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जीके ने कहा कि दिल्ली कमेटी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि संगतों  से सोने की पालकी साहिब करतारपुर में स्थापित करवाने व गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की सोने की जिल्द,चवर तथा छत्र के नाम पर गहने तथा नकदी बटोरने के बाद अब प्रबंधकों के पास इसे संगतों को वापस लौटाने की कोई विधि भी नहीं सूझ रहीं।
इनकी नालायकी के कारण न संगतों को वीजा मिला न नकदी व सोना। इसलिए बल व छल से सत्ता में आई टीम सिरसा को तुरंत इस गलती के लिए गुरु साहिब के समक्ष पश्चाताप की अरदास करके अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए। जीके ने कहा कि शुरू से कौम की भावना थी कि एक नगर कीर्तन दिल्ली से ननकाना साहिब तक जाना चाहिए, वो अपने आप ही गुरु ने मंजूर कर ली है।
जत्थेदार जी, के द्वारा कौमी भावनाओं का सम्मान करते हुए एक नगर कीर्तन की बात करना स्वागत योग्य कदम है। पर दिल्ली के ऐतिहासिक गुरदवारों में सोने की सेवा के लिए कई गोलकें रखने वालें प्रबंधकों को पंथक परंपराओं के अनुसार दंडित करने की प्रक्रिया भी जत्थेदार जी को कौम के सामने रखनी चाहिए।

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