सूचना आयुक्त को जुर्माना घटाने का अधिकार नही: कोर्ट

शिमला : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सूचना का अधिकार क़ानून (Right to Information) के संबंध मे एक बेहद ख़ास फ़ैसला दिया है| वह ये की सूचना आयुक्त क़ानून मे तय की गई जुर्माने की रकम को कम नही कर सकते| सूचना देर से देने वाले अधिकारियों को ढाई सो रुपये प्रतिदिन के हिसाब से ही जुर्माना अदा करना होगा !

हिमाचल प्रदेश राज्य मुख्‍य सूचना आयुक्त के फैसले से असंतुष्ट पत्रकार संजय हिंदवान ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। न्यायाधीश दीपक गुप्ता और न्यायाधीश संजय करोल ने अपना फैसला संजय हिंदवान के पक्ष में रखते हुए यह व्यवस्था दी कि राज्य सूचना आयोग को सूचना के अधिकार अधिनियम में निर्धारित आर्थिक दंड को घटाने की कोई कानूनी ताकत नहीं है। वह चाहे तो जुर्माना लगा सकता है या माफ भी कर सकता है।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट की खंडपीड के समक्ष इस मामले को उठाया था कि मुख्‍य सूचना आयुक्त ने एक शिकायत का निपटारा करते हुए 14 दिनों की देरी के लिए 1500 रुपए का जुर्माना लगाया है। अपनी दलील पेश करते हुए याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 के तहत सूचना आयुक्त के पास यह अधिकार नहीं है कि वह 250 रुपए प्रतिदिन के जुर्माने की दर को कम कर सके। अदालत में इस दलील को सही मानते हुए सूचना अधिकारी पर 3500 रुपए जुर्माना लगाते हुए शेष 2000 रुपए का जुर्माना और लगाया है तथा जुर्माना राशि दो सप्ताह के भीतर जमा करने के आदेश जारी किए हैं।
इससे पहले याचिकाकर्ता ने सूचना आयोग के समक्ष 72 दिन देरी से सूचना मिलने और सूचना पर आयोग के हस्तक्षेप के बाद सूचना देने की शिकायत की थी। मुख्‍य सूचना आयुक्त भीम सेन ने मामले की सुनवाई करते हुए अपने फैसले में शिकायत को सही पाया था और नगर परिषद सोलन के सूचना अधिकारी पर 14 दिन के लिए 1500 रुपए जुर्माना लगाया था। जिसे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने ठीक करते हुए सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 20 के तहत जुर्माना शशि को 3500 बताया तथा शेष 2000 रुपए और जुर्माने के आदेश सुनाए।
याचिकाकर्ता संजय हिंदवान ने कहा कि वह अधिनियम की अवहेलना के मामले को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय में गए थे जहां उनकी बात को सही करार दिया गया है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जिन्हें सूचना देरी से मिलती है और नाम मात्र जुर्माना लगाकर उन्हें छोड़ दिया जाता है। इस फैसले के बाद सूचना के अधिकार अधिनियम को प्रदेश में और ताकत मिली है।

Source: GrasIndia

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