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सफ़ेद मक्खी का इलाज और कपास का बचाव

सफ़ेद मक्खी का इलाज: कीट विकास नियामक कीटनाशकों का छिड़काव करें

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सफ़ेद मक्खी का इलाजसफ़ेद मक्खी का इलाज : कपास की फसल को सफेद मक्खी के हमले से बचाने के लिए हरियाणा कृषि विभाग ने किसानों को एडवाइजरी जारी की है। ।

एहतियाती उपायों में नीम के घोल और कीटों के हमले की निगरानी रखने जैसे उपाय शामिल हैं।

संक्रमण को रोकने के लिए विभाग ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, सिरसा और बेयर क्रॉप साइंस द्वारा सुझाए तरीके अपनाने को कहा है।

प्रति एकड़ 40 से 50 कम लागत वाले पीले चिपचिपे ट्रैप की स्थापना करना शामिल है।

सफ़ेद मक्खी का हमला रोकने के लिए एक इमल्शन के दो स्प्रे करें

बुवाई के 70 दिन बाद तक, किसान एक इमल्शन के दो स्प्रे कर सकते हैं। इसमें एक प्रतिशत नीम का तेल और 0.05 से 0.10 प्रतिशत कपड़े धोने का डिटर्जेंट, या निम्बीसीडीन (0.03 प्रतिशत या 300 पीपीएम) शामिल है।

यह इमल्शन एक लीटर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया के बाद एक अन्य इमल्शन के दो स्प्रे करने होंगे, जिसमें कैस्टर ऑयल और 0.05 से 0.10 प्रतिशत कपड़े धोने वाला डिटर्जेंट शामिल है।

किसानों को पूरे सीजन के दौरान, जब भी आवश्यक हो, नीम आधारित कीटनाशकों का प्रयोग करते रहना चाहिए।

कीट विकास नियामक कीटनाशकों का छिड़काव करें

किसानों को मध्य अगस्त के बाद कीट विकास नियामक कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है ।

सुझाए गए कीटनाशकों में डाईफेन्थाईयूरान (पोलो) नामक दवा की 200 ग्राम मात्रा, फ्लोनिकामिड 50डब्ल्यूजी दवा की 80 ग्राम मात्रा, डाईनॉटिफेयूरान 20 प्रतिशत एसजी की 60 ग्राम मात्रा और क्लोथियानिडिन 50डब्ल्यूजी की 20 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें ।

ये कीटनाशक सफेद मक्खी के खिलाफ प्रभावी हैं और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं।

सीजऩ के बाद यानी 15 सितंबर के बाद सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए इथिऑन की 800 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से सीमित मात्रा में उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।

अगस्त -सितम्बर में सफ़ेद मक्खी को ऐसे करें नियंत्रित

अगस्त-सितंबर में सफेद मक्खी की आबादी ईटीएल को पार कर जाने पर, डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी या ऑक्सिडेमेटन मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी और नीम आधारित कीटनाशक (निम्बीसीडीन या अचूक) की एक लीटर की मात्रा को 250 लीटर पानी के साथ मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं।

इसके अलावा, सफेद मक्खी की निम्फल जनसंख्या पर काबू पाने के लिए स्पाइरोमेसिफेन (ओबेरोन) 22.9 प्रतिशत एससी की 200 मि.ली. या पायरीप्रोक्सीफेन (डायटा) 10 प्रतिशत ईसी नामक दवा की 400 मि.ली. मात्रा को प्रति एकड़ की दर से 200 से 250 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव कर सकते हैं। एक ही कीटनाशक का लगातार छिडक़ाव नहीं किया जाना चाहिए।

यदि अंडे और निम्फ की अधिक आबादी के कारण पत्तियों के नीचे थैली कवक दिखाई देता है, तो स्पाइरोमेसिफेन की 250 मि.ली. या पायरीप्रोक्सीफेन दवा की 400 से 500 मि.ली. या ब्यूप्रोफेजिन 25 एससी की 400 मि.ली. मात्रा को प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव कर सकते हैं।

यदि सफेद मक्खी और थ्रिप्स का मिश्रित संमक्रमण देखने को मिलता है, तो किसानों को डाईफेन्थाईयूरान नामक दवा की 200 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ की दर से उपयोग करना चाहिए और कीटनाशकों का मिश्रण नहीं करना है।

यदि सफेद मक्खी और लीफहॉपर का मिश्रित संक्रमण दिखाई दे तो किसानों को फ्लोनिकामिड 50 डब्ल्यूजी दवा की 80 ग्राम मात्रा या डाईनॉटिफेयूरान 20 प्रतिशत एसजी की 60 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव कर सकते हैं।

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