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हरियाणा शराब घोटाला : क्या सरकार दोषियों पर कारवाई करेगी

हरियाणा शराब घोटाला : विपक्ष की घेराबंदी तेज, हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच की मांग

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हरियाणा शराब घोटाला सामने आने के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है

कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने सरकार पर घोटाले को दबाने और अधिकारियों पर घोटालेबाज़ों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

शराब माफियों को बचाने के लिए ड्रामा कर रहे हैं विज और चौटाला : हूडा

हरियाणा शराब घोटाला विपक्ष को बैठे बिठाये एक मुद्दा दे गया है।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य एवं राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने  कहा कि शराब घोटाले के असली गुनहगारों और चहेते शराब माफियाओं को बचाने के लिए सरकार आबकारी और गृहमंत्री के टकराव का ड्रामा कर रही है। शराब घोटाले के असली घोटालेबाजों तक पहुंचने के लिए हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच जरूरी है।

दीपेंद्र ने कहा कि वे पहले दिन से ही इस बात की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब सारी दुनिया कोरोना से लड़ रही थी, तब हरियाणा सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोग शराब घोटाले, रजिस्ट्री घोटाले को अंजाम दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के आबकारी मंत्री और गृह मंत्री खुले तौर पर शराब घोटाले में एक दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।

“ऐसे में दोनों मंत्रियों के पद पर रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं, इसलिए दोनों को जांच पूरी होने तक अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए” दीपेंद्र ने कहा.

उनके अनुसार सरकार अपने ही बुने जाल में फंस गई है। शराब घोटाले को दबाने की तमाम साजिशें नाकाम हो रही हैं।

सरकार की मिलीभगत से हुआ  हरियाणा शराब घोटाला : इनैलो

इनेलो नेता और विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान शराब की लाखों बोतलें अधिकारियों के साथ सरकार में बैठे लोगों ने मिलीभगत करके डिस्टलरी से निकालकर महंगे दामों पर बेच दी।

उन्होंने कहा कि एसईटी आबकारी कमिश्नर को दोषी करार दे रही है और आबकारी मंत्री उन्हें क्लीनचिट देकर सीधे सरकार को चुनौती दे रहे हैं, क्योंकि ये एसईटी मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही गठित हुई थी।

इनेलो नेता ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान पुलिस के नाके हर तरफ लगे हुए थे फिर ये शराब की तस्करी कैसे हुई? गृहमंत्री विजिलेंस जांच के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।

जांच में जो दोषी होगा उसके खिलाफ होगी कार्रवाई : मनोहर लाल खट्टर

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शराब घोटाले पर अपना रुख साफ कर दिया है।

सीएम ने कहा कि जांच में जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी। उनके इस रुख से गृहमंत्री अनिल विज द्वारा शराब घोटाले में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिशों को बल मिला है।

सरकार ने ये साफ कर दिया है कि एसईटी की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई जरूर होगी।

“सरकार का जो काम होता है वो सिस्टम से होता है। सरकार को जो शिकायतें मिली उस पर एक एसईटी बनाई गई। एसईटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। गृह मंत्री ने रिपोर्ट पर अपनी आब्जर्वेशन के बाद कुछ लोगों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। अब रिपोर्ट में जो भी सिफारिशें की गई हैं। वो हमारे पास आएंगी। अब हम उस पर बैठकर विचार करेंगे कि क्या-क्या करना है। मगर ये साफ है कि भ्रष्टाचार किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसी के मानने या न मानने से व्यवस्था नहीं चलती। काम सिस्टम से होता है और सिस्टम से ही होगा। मगर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा।” – मनोहर लाल, मुख्यमंत्री

अनिल विज और दुष्यंत चौटाला के बीच तनातनी

विज और चौटाला अफसरों पर कारवाई को लेकर आमने सामने हैं। अनिल विज एक अधिकारी के खिलाफ करवाई चाहते हैं और चौटाला उसके पक्ष में उतर आये हैं।

विवाद तब शुरू हुआ जब आबकारी एवं कराधान मंत्री व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला अपने महकमे के अधिकारियों के पक्ष में खुलकर उतर आए।

उन्होंने एसईटी की रिपोर्ट पर सवाल करते हुए अपनी ओर से आईएएस अफसर शेखर विद्यार्थी को क्लीनचिट तक दे डाली।

यही नहीं चौटाला ने प्रदेश की पुलिस के समक्ष भी ऐसे मामलों की जांच में कई तरह के सवाल खड़े कर डाले।

दुष्यंत ने साफ कहा कि पिछली कई एफआईआर ऐसी हैं, जिनकी पुलिस जांच शराब तस्करी में पकड़े गए वाहन चालकों से ही आगे नहीं बढ़ती।

उप मुख्यमंत्री के मुताबिक उनका विभाग और अधिकारी अपना काम अछि तरह रहे हैं। एसईटी की जांच को और गंभीरता व गहन अवलोकन की जरूरत थी।

चौटाला के अनुसार एसईटी के कई सुझाव तो ऐसे हैं, जो पहले से ही 2020-21 की आबकारी नीति का हिस्सा हैं।

जबकि लॉकडाउन शुरू होते ही प्रदेश के तमाम शराब के ठेके भी बंद करवा दिए गए थे।

हर जिले से रिपोर्ट आबकारी अफसरों द्वारा उन तक पहुंची थी। अब इस शराब घोटाले में ये कहा जाए कि सारा दोष आबकारी विभाग का है, यह उचित नहीं।

लेकिन खट्टर के ब्यान के बाद गृहमंत्री और उप मुख्यमंत्री के बीच तनातनी पर सरकार का रुख भी क्लीयर हो गया है।

गौरतलब है कि मामले की जांच के लिए गठित एसईटी ने हरियाणा में हुए लॉकडाउन घोटाले में अपनी रिपोर्ट गृहमंत्री को सौंप दी है।

रिपोर्ट में साफ किया गया है कि न केवल लॉकडाउन पीरियड में बल्कि उससे पहले भी सोनीपत में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से शराब घोटाला होता रहा।

जांच रिपोर्ट में एसईटी ने आईएएस अफसर शेखर विद्यार्थी और आईपीएस प्रतीक्षा गोदारा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

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