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मोदी सरकार ने बिना तैयारी के आम जनता पर थोपा गया लॉक डाउन : CPI

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि आयकर ना भरने की श्रेणी में आने वाले सभी परिवारों को 6 महीने की अवधि के लिए 7500 रुपये प्रति माह का नकद हस्तांतरण किया जाए

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वामपंथी पार्टियों के राष्ट्रीय आह्वान पर आज गुरुग्राम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त गुड़गाँव के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति व हरियाणा के मुख्य मंत्री के नाम कोरोना महामारी से पीड़ित आम लोगों की पीड़ा से आपको अवगत करवाते हुये ज्ञापन भिजवाया।

गुड़गाँव के वामपंथी नेताओं का कहना है की कोरोना महामारी के समय में मोदी सरकार ने देश की व्यापक जनता को बर्बादी की हालत में छोड़ दिया गया है तथा सरकार बिना सोचे-समझे अमानवीय ढंग से काम कर रही है।

जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष कामरेड उषा सरोहा ने कहा कि सरकार ने बिना किसी पूर्व तैयारी एवं योजना के अचानक चार घंटे के नोटिस पर थोपे गये लाकडाउन ने जनता के विशाल हिस्से को अमानवीय दुर्गति का शिकार बनाया है। प्रवासी श्रमिकों व भारतीयों की दुर्दशा असहनीय है जो लगातार यातना और पीड़ा झेल रहे हैं और भूख-प्यास, थकावट और दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं।

लाकडाउन ने महामारी से निपटने के लिए न तो हमारी क्षमता को मजबूत किया और ना ही इसने लोगों को कोई राहत पहुँचाई। किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार, छोटे कारोबारी एवं छोटे उद्योग तबाही के कगार पर पहुँच गये हैं। युवाओं को अभूतपूर्व बेरोजगारी की मार झेलनी पड़ रही है। ऊपर से महामारी की स्थिति में मोदी सरकार देश में तानाशाही थोपने की ताबड़-तोड़ कोशिश कर रही है।

राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि आयकर ना भरने की श्रेणी में आने वाले सभी परिवारों को 6 महीने की अवधि के लिए 7500 रुपये प्रति माह का नकद हस्तांतरण किया जाए तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाते हुए प्रवासियों समेत सभी को 6 महीने के लिए प्रति महीना प्रति व्यक्ति 10 किलो खाद्यान्न मुफ्त वितरित किया जाए। अभी भी फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों को उनके मूल स्थानों तक पहुँचाने के लिए तुरंत भोजन और पानी कि व्यवस्था करते हुये मुफ्त परिवहन साधन उपलब्ध कराये जाए।

मनरेगा के तहत न्यूनतम 200 दिन रोजगार बढ़ी हुई मजदूरी के साथ सुनिश्चित किया जाए तथा शहरी गरीबों के लिए भी रोजगार गारंटी कानून का विस्तार किया जाए। पैट्रोल, डीजल, घरेलू गैस पर टैक्सों और टोल दरों की बढ़ोतरी वापस ली जाए।

सीएए, एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कानून कि संगीन धाराओं और यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए और यूएपीए कानून को निरस्त किया जाए।

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