North India Times
North India Breaking political, entertainment and general news

समर्पण दिवस पर निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी को श्रद्धांजलि

निंरकारी भक्तों ने संसार भर में निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज को समर्पण दिवस पर अपने अपने घरों में रहकर दी श्रद्धांजलि

0 25

Warning: A non-numeric value encountered in /home/northcyp/public_html/wp-content/themes/publisher1/includes/func-review-rating.php on line 212

Warning: A non-numeric value encountered in /home/northcyp/public_html/wp-content/themes/publisher1/includes/func-review-rating.php on line 213

संयोजक ब्रांच चण्डीगढ़ , नवनीत पाठक  ने बताया कि निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी ने मिशन के आध्यात्मिक प्रमुख के रुप में 36 साल मिशन की बागड़ोर सम्भाली और चार साल पहले इसी (13 मई के) दिन अपने नश्वर शरीर का त्याग कर अपने निराकार रुप में विलीन हो गए।

उसके बाद निरंकारी मिशन द्वारा हर वर्ष यह दिन उनकी याद में समर्पण दिवस के रूप में मनाता हैं। इस वर्ष कोरोना महामारी के वैश्विक संकट को देखते हुए सरकार के निर्देशों को सम्मुख रख कर समर्पण दिवस पर किसी भी विशेष सत्संग समारोह का आयोजन न करते हुए घर बैठे ही ऑनलाईन निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के एक वीडियो संदेश को सुनकर निरंकारी भक्तो ने बाबा हरदेव सिंह जी के प्रति अपने अपने मन के भाव और श्रद्धा सुमन अर्पित किऐ।

निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के एक वीडियो संदेश में सम्बोधित करते हुए कहा कि निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के एक बार भी जिस किसी को दर्शन हुए वह उनका ही होकर रह गया। बहुत दिव्य और मनोहारी रूप था उनका, उनकी गहरी छाप जिस पर भी पड़ी वह उसके हृदय में अमिट हो गई। उनकी दृष्टि अत्यंत विशाल थी। हर भाषा हर देश के मानव अपने ही तो सारे हैं, ऐसी सोच केवल उन जैसा मानवता का मसीहा ही सोच सकता था। बाबा जी ने हम सब को भरपूर प्यार और आशीर्वाद दिया। इस दुनिया में कैसे जीना है, खुद जी कर हमें दिखाया। उन्होेंने कहा कि बाबा जी ने हमेशा हमें शब्दों तथा जीवन की सादगी द्वारा हमें यह शिक्षा दी।

माता जी ने आगे कहा कि बाबा जी समझाया करते थे कि भक्ति में कभी शर्तें नहीं होती। भक्त हमेशा सब कुछ निरंकार पर छोड़कर इसकी रज़ा में रहता है।

इस अवसर पर सद्गुरु माता जी ने अवनीत सेतिया जी को भी याद किया। सेतिया ने भी उसी दिन प्राण त्यागे थे। सद्गुरु माता जी ने कहा कि उन्हें बचपन से ही सेवा तथा सत्संग के प्रति लगन थी और जो कुछ भी सत्संग में सुनते थे, उसे अपने जीवन में अपना लेते थे।

अंत में सद्गुरु माता ने कहा कि जैसा जीवन बाबा जी ने हम से चाहा, जैसा मिशन बाबा जी ने हम से चाहा, निरंकार से अरदास है कि हर कोई वैसा ही जीवन जी पाए और मिशन को भी आगे बढ़ाता जाये।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.