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पीटीआई भर्ती घोटाला : पूर्व चेयरमैन ,सदस्यों पर केस

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन और सदस्यों पर 1983 पीटीआई सिक्स कॉम को गलत नौकरी देने का आरोप

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2005 से 2010 के बीच हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन ब्रिगेडियर रिटायर्ड
नंदलाल पूनिया थे।

 हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग में भर्तियों के घोटाले कोई नई बात नहीं है.

अब राज्य में कांग्रेस सरकार के दौरान हुई पीटीआई शिक्षकों की भर्तियों का घोटाला सामने आया है।

विजिलेंस विभाग ने आयोग के पूर्व चेयरमैन और सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है।

इस पर उनके खिलाफ धारा 166, 193 ,466, 468 ,471, 120 बी भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की धारा 13 (2) और (1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ऐसे हुआ पीटीआई नौकरी घोटाला

आरोप है कि इन लोगों ने 1983 पीटीआई शिक्षकों को गलत तरीके से नौकरी दी।

यह भर्ती पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में साल 2006 में शुरू हुई थी और 2010 में पूरी हुई।

FIR के मुताबिक आयोग ने 20 जुलाई 2006 को पीटीआई भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे । 

भर्ती के लिए 200 अंक लिखित परीक्षा और 25 इंटरव्यू के थे ।

आरोप है कि चेयरमैन और सदस्यों ने पद का दुरुपयोग कर अयोग्य उम्मीदवारों को भर्ती किया।

चेयरमैन ने  30 जुलाई 2008 को भर्ती मापदंडों में बदलाव किया । इसके बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और भर्ती रद्द कर दी गई ।

FIR के मुताबिक चेयरमैन ने आयोग के सदस्यों से मिलकर झूठे दस्तावेज तैयार करवाए ।

चहेते उम्मीदवारों को साक्षात्कार में अधिक जबकि योग्य उम्मीदवारों को कम अंक दिए ।

कर्मचारी चयन आयोग में ऐसे होती है भर्तियां

किसी भी राज्य का कर्मचारी चयन आयोग में भर्तियां इंटरव्यू और लिखित परीक्षा के आधार पर होती हैं।

अक्सर योग्य उम्मीदवार लिखित परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करते हैं ।

लेकिन चहेते उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए साक्षात्कार इंटरव्यू भी रखा जाता है।

चहेतों को साक्षात्कार में जानबूझकर अच्छे अंक दिया जाते हैं और योग्य उम्मीदवारों को कम।

यही कारण है कि सरकारी नौकरियों में भर्ती होने वाले ज्यादातर लोग सिफारिशी और योग्य नहीं होते।

दरअसल सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।

राजनीतिज्ञ या तो नौकरियां बेचते हैं या फिर पदों को रेवड़ी की तरह मनपसंद लोगों को बांट देते हैं।

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